हमने संसार को बुद्ध दिया युद्ध नहीं, तो देश के नागरिक को देने में आनाकानी क्यों

 

लुधियाना,(समाज वीकली)- अंबेडकर नवयुवक दल पंजाब, संविधान बचाओ मोर्चा, अखिल भारतीय मौर्य महासंघ, बामसेफ सहित कई अंबेडकरी एवं बौद्ध संगठन साकेत मुक्ति आंदोलन के बैनर तले इकट्ठा होकर दल के पंजाब प्रमुख बंसीलाल प्रेमी बामसेफ से जोगिंदर राय, पंजाब बुद्धिस्ट सोसाइटी से रामदास गुरु, मौर्य संग से विजय मौर्य एवं डॉ प्रमोद चौधरी की अगुवाई में एक शिष्टमंडल लुधियाना डीसी वीरेंद्र शर्मा को मिलकर महामहिम राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर अयोध्या में निकल रहे बौद्ध अवशेषों की ट्रैक्टर एवं जेसीबी द्वारा खुदाई कर हो रही बेअदबी को रोककर पुरातत्व विभाग एवं वीडियो फुटेज की निगरानी में दिन के उजाले में करवाई जाए और वहां पर निकल रहे सबूत के आधार पर मंदिर, मस्जिद या बौद्ध स्थल का निर्माण हो प्रैस से बात करते हुए बंसीलाल प्रेमी ने कहा वहां पर पहले सर्वे में कनिंघम द्वारा 1862-63 में करवाए गए सर्वे में बौद्ध स्थल बताया था और 1869-70 में प्रो. अवध किशोर की अगुवाई में करवाई गई खुदाई में बुद्ध अवशेष मिले और पांचवी सदी में फाह्यान द्वारा करवाए गए सर्वे में भी बुद्ध अस्थल बताया गया था और अब सुप्रीमकोर्ट द्वारा फैसला आने के बाद समतली करण में निकल रहे बौद्ध स्तूप, शीलालाट एवं मूर्तियां यह साबित करती हैं कि यहां पर बौद्ध स्थल मौजूद रहा इसलिए सभी अंबेडकरी बौद्धिक संस्थाएं भारत के महामहिम राष्ट्रपति जी से मांग करती हैं कि जब देश का कानून सबूत के आधार पर चलता है तो यहां पर भी न्याय आस्था के बजाए सबूत के आधार पर हो जिसका अवशेष या सबूत मिले उसका सम्मान के साथ संग्रहालय या मंदिर बनाकर देश की जनता को समर्पित किया जाए और भारत के प्रधानमंत्री तो विदेशों में जाकर बुद्ध की धरती का होने का डंका पीटते हैं और कहते हैं हमने संसार को बुद्ध दिया युद्ध नहीं तो देश के नागरिक को देने में आनाकानी क्यों !

इस अवसर पर विजय चौहान, अमन गुड़े, रंजीत सिंह टैबी, अवतार सिंह बोपाराए, सुदर्शन, संजय कुमार राव, विनोद एकलव्य, निर्मल सिंह सोखी, राजेंद्र कुमार सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे !

Previous articleਬਾਬਾ ਜਸਵੰਤ ਸਿੰਘ ਕੰਵਲ ਦੀ ਜਨਮ ਸ਼ਤਾਬਦੀ
Next articleProtestors Demand the Acknowledgement of Institutional Racism in the UK