लोकतंत्र बचाने के लिए न्यायतंत्र का स्वतंत्र होना अत्यंत जरूरी – समता सैनिक दल

जालंधर:  ऑल इंडिया  समता सैनिक दल (रजि) पंजाब इकाई के प्रदेश अध्यक्ष जसविंदर वरियाणा  ने एक प्रेस बयान में कहा कि नई दिल्ली में हुई हिंसा में कम से कम 42 लोग मारे गए और 200 से अधिक घायल हो गए। भाजपा के सहयोगी शिरोमणि अकाली दल के सांसद नरेश गुजराल ने गृह मंत्री अमित शाह से कहा है कि दिल्ली पुलिस की विफलता ने 1984 के सिख विरोधी दंगों की याद को ताज़ा कर दिया है। वरियाणा ने कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस मुरलीधर ने दिल्ली पुलिस को भाजपा नेताओं अनुराग ठाकुर, परवेश वर्मा और कपिल मिश्रा और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के बारे में जागरूक करने के लिए कहा था जिन्होंने राष्ट्रीय राजधानी में घृणा फैलाने  वाले  भाषण दिए और हिंसा भड़काई। न्यायमूर्ति मुरलीधर  ने ‘दुख’ व्यक्त किया कि राष्ट्रीय राजधानी जल रही है और मामला दर्ज करने में देरी पर सवाल उठाया। उन्होंने केंद्र, राज्य सरकार और दिल्ली पुलिस की राष्ट्रीय राजधानी में हुयी हिंसा बारे  खिंचाई  भी की थी।

जसविंदर वरियाणा ने कहा कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि एफआईआर को उचित स्तर पर पंजीकृत किया जाएगा। एफआईआर तो दायर नहीं किये गये, लेकिन न्यायमूर्ति एस मुरलीधर को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया गया है क्योंकि उन्होंने दिल्ली पुलिस द्वारा घृणा फैलाने  वाले  भाषण के खिलाफ एक एफआईआर दायर करने में विफलता पर अपना दुख व्यक्त किया। वरियाणा ने आगे कहा कि जस्टिस एस मुरलीधर दिल्ली हाईकोर्ट के वही जज थे जिन्होंने उत्तर प्रदेश प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी सदस्यों को  हाशिमपुरा नरसंहार में दोषी ठहराया था और यहां तक ​​कि 1984 के सिख विरोधी दंगों में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को भी दोषी ठहराया गया था। वरियाणा ने कहा कि ऑल इंडिया  समता सैनिक दल  दिल्ली और देश भर में हुयी हिंसा की कड़ी निंदा करता  है  और मांग करता है कि लोकतंत्र को बचाने के लिए न्यायतंत्र पर किसी भी राजनीतिक दल का  प्रभाव नहीं होना चाहिए, बल्कि  देश की भलाई और प्रगति के लिए न्यायतंत्र  की स्वतंत्रता  अत्यंत जरूरी   है। इस अवसर पर वरिंदर कुमार, एडवोकेट कुलदीप भट्टी, बलदेव राज भारद्वाज और तिलक राज उपस्थित थे।

 

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