छत्तीसगढ़ बिरसा अम्बेडकर फूले स्टूडेंट्स एसोसिएशन (BAPSA) का तीन दिवसीय छात्र अधिवेशन बिलासपुर में संपन्न

बिलासपुर,(समाज वीकली)- बिरसा अम्बेडकर फूले स्टूडेंट्स एसोसिएशन (BAPSA) छत्तीसगढ़ राज्य के तत्वावधान मे तीन दिवसीय प्रदेश स्तरीय कार्यशाला सफलता पूर्वक सम्पन्न हुआ जिसमें प्रदेशभर से सैकड़ों छात्र छात्राएं शामिल हुए‌। कार्यक्रम बिलासपुर में 26, 27, 28 फरवरी 2021 को संपन्न हुआ। कार्यक्रम मे अनेक वक्ताओं ने शिक्षा पर ध्यान देने की बात कही जिससे छात्र-छात्राएं आगे चलकर देश दुनिया में अपने, अपने समाज और देश का नाम रोशन कर सके।

कार्यक्रम के प्रथम दिवस में प्रभाकर ग्वाल साहब पूर्व, मजिस्ट्रेट सीबीआई, श्री राम विश्वकर्मा पूर्व प्रबंधक बाल्को, रमेश जाटवर व्याख्याता कोरबा, पुरुषोत्तम सर, राकेश डिस्पट जी, श्री चंद्रशेखर खरे, कृषि वैज्ञानिक जांजगीर, गणेश कोशले पीएचडी स्कॉलर गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर। कार्यक्रम के द्वितीय दिवस में डॉ गोल्डी. एम जार्ज सामाजिक कार्यकर्ता, दीनानाथ यादव बस्तर विश्वविद्यालय, डॉ. प्यारेलाल आदिले, प्राचार्य जय बुढा देव कॉलेज, कला एवं विज्ञान महाविद्यालय कटघोरा, प्रो. मनहरण अनंत कटघोरा कोरबा, रजनी सोरेन अधिवक्ता बिलासपुर, श्री ललित जांगड़े अधिवक्ता बिलासपुर, अर्चना बौद्ध पीएचडी स्कॉलर रायपुर, श्री राजकुमार बौद्ध आई.एन.ई.बी. इंस्टिट्यूट थाईलैंड, लोकेश पूजा उकेजी। वहीँ कार्यक्रम के तृतीय दिवस के मुख्य अतिथि श्री रतन लाल डांगी पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर, कृपा शंकर, डॉ.अमिता गुरूघासी दास केंद्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर, डॉ संतोष बंजारे असिस्टेंट प्रोफेसर, डॉ. गुंजन पाटील असिस्टेंट प्रो. गुरुघासी केंद्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर, डॉ. मुलायम सिंह यादव जेएनयू सोशल एक्टिविस्ट, डॉ जितेंद्र सोनकर सोशल एक्टिविस्ट, अजीत कुमार जोगी पीएचडी स्कॉलर हैदराबाद विश्वविद्यालय, तुलसी ध्रुव आदिवासी चिंतक, संजीत बर्मन आदि अतिथियों ने अपनी अपनी बात रखी कि किस प्रकार से शिक्षा को आगे बढ़ाया जा सके और वर्तमान शिक्षा की दशा और दिशा पर चिंतन किया। जिसमें शिक्षा के निजीकरण उसके दुष्परिणाम , शिक्षा का व्यवसायीकरण, नई शिक्षा नीति के नुकसान, अंग्रेजी शिक्षा का महत्व आदि पर गंभीरता से चर्चा की गई।

अधिवेशन के प्रथम दिन पूर्व जज प्रभाकर ग्वाल ने संविधान की प्रस्तावना पढ़ने के साथ में कार्यक्रम का शुभारंभ किया और छात्र जीवन में कानून और संविधान कितना महत्वपूर्ण है इस पर चर्चा किया गया देश के तमाम स्कूल कॉलेज और विश्वविद्यालयों में संविधान कितनी महत्वपूर्ण है और उसे क्यों पढ़ाया जाना चाहिए। कृषि वैज्ञानिक चंद्रशेखर खरे ने छात्रों को कृषि संबंधित और इसके भविष्य में किस तरीके से रोजगार संबंधित काम कर सकते हैं इस पर अवगत कराया और उनको शिक्षा के लिए प्रेरित किया। गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के पीएचडी स्कॉलर गणेश कोसले ने छात्र जीवन के संघर्ष पर अपनी बात रखी है और पढ़ाई के साथ में सामाजिक मुद्दों पर चर्चा करना चाहिए जिससे बौद्धिक क्षमता का विकास होता है और लोकतंत्र की यह एक बहुत बड़ी खूबसूरत है कि जहां पर चर्चा होना बहुत जरूरी है और इसके लिए उन्होंने छात्रों को कहा कि पढ़ाई के साथ सामाजिक मुद्दों के लिए तत्पर होना जरूरी है ।

कार्यक्रम के दूसरे दिन डॉक्टर गोल्डी एम जार्ज ने कहा कि वह देश और दुनिया के तमाम विषयो और मुद्दों पर अपनी बात रखते आए हैं और तमाम छात्रों को छात्र जीवन में होने वाली तकलीफ और समस्याओं से अवगत कराते हुए उनको किस तरीके से उच्च शिक्षा के लिए प्रयास करना है और शिक्षा सिर्फ नौकरी के लिए नहीं समाज में समता स्वतंत्रता और बंधुता का निर्माण करने के लिए एक मजबूत माध्यम है जिसे हम सब मिलकर मजबूत बना सकते हैं और यही लोकतंत्र की सबसे बड़ी खूबसूरत है जिसमें हम तमाम विषयों को पढ़ कर उस पर खोज करें और देश को आगे बढ़ाने में योगदान‌ दे सके। वहीँ असिस्टेंट प्रोफेसर दीनानाथ यादव बस्तर विश्वविद्यालय ने कहा कि छात्रों को शिक्षा के माध्यम से समाज में हो रहे बदलाव को पढ़ने और समझने की जरूरत है। रजनी सोरेन अधिवक्ता ने बताया कि अनुसूचित जाति जनजाति वर्ग के ऊपर होने वाले जातिगत अत्याचार से लड़ने के लिए शिक्षा को एक बहुत बड़ा हथियार बताया जो कि समाज में हो रहे अत्याचारों के खिलाफ काम आता है ।

कार्यक्रम के तीसरे दिन के मुख्य वक्ता रहे श्री रतनलाल डांगी, पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर ने छात्रों को कठिन परिश्रम को सफलता का हथियार बताया और उन्होंने अपने जीवन में जिस तरीके से पढ़ाई के साथ साथ काम किया और आज और जिस मुकाम पर पहुंचे हैं उसके लिए उन्होंने जितना कठिन परिश्रम किया उनके बारे में बताएं उन्होंने कहा कि बाबा साहब ने 18 घंटे तक पढ़ाई किया था तब जाकर देश का संविधान बना और उन्होंने अपने जीवन भर पढ़ाई को जारी रखा साथ में उन्होंने कहा मानव जीवन में पढ़ाई के साथ बाबासाहेब आंबेडकर ने गौतम बुद्ध को पढ़कर उनके बताए हुए शांति के मार्ग पर चलने का प्रण लिया और समता स्वतंत्रता बंधुता न्याय पर आधारित समाज बनाने के लिए पढ़ाई किया और पढ़ाई के दम पर उन्होंने देश का संविधान लिखा और उस देश के संविधान में हर एक नागरिक को एक समान जीवन जीने और एक दूसरे के साथ माननीय व्यवहार निर्माण करने की बात कही जहां पर किसी भी प्रकार से कोई भेदभाव ना हो इसके लिए उन्होंने काम किया आज भारत में जिस तरह के हालात हैं व शिक्षा से ही बेहतर हो सकता है शिक्षा को हर व्यक्ति तक पहुंचाने की जरूरत है और बाबा साहब अंबेडकर ने शिक्षा को जीवन का मूल आधार बताया है।

इस तीन दिवसीय छात्र सम्मेलन में देश के तमाम शोषित वंचित तबकों से आने वाले छात्रों की समस्याओं पर चर्चा किया गया जिस तरीके से वंचित समाज के छात्रों के साथ सामाजिक आर्थिक और जाति का भेदभाव होती है जिसका जीता जागता उदाहरण रोहित वेमुला है जहां उन्हें उच्च शिक्षा के दौरान जातिगत भेद भाव के कारण जान गवानी पडी थी इसी तरीके से देश के तमाम शिक्षण संस्थानों में जातिवादी मानसिकता के लोग छात्रों को प्रताड़ित करने का काम करते हैं इन तमाम मुद्दों को लेकर बापसा ने आवाज बुलंद करने की बात कही और देश में जातिगत भेदभाव के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाने के साथ में वंचित समाज के छात्रों को शिक्षा के बेहतर अवसर मिल सके इसके लिए निरंतर समाज में जागरूकता फैलाने के लिए काम करने की जरूरत है और यह संगठन इसी तमाम मुद्दों को लेकर बनाया गया है जो कि आज देश के तमाम जगहों पर अपना प्रतिनिधित्व कर रहा है । उपस्थित सभी छात्र-छात्राओं द्वारा एक प्रस्ताव पारित कर सरकार से अपनी माँग रखी है। कार्यक्रम में बिरसा आम्बेडकर फुले स्टुडेट्स एसोसिएशन छत्तीसगढ़ प्रदेशाध्यक्ष गणेश कोशले, संजीत बर्मन, राजकुमार, अजीत धृतलहरे, परमानंद बंजारे, गनेश खुटे, छोटू खुटे, जागृत खांडे, पूर्णचंद, अर्चना बौद्ध, हर्ष प्रिया, बिंदिया बौद्ध, कु. रागनी, कु.रजनी, प्रमोद नवरत्न, पेंशन गेन्ड्रे, पुरषोत्तम, विक्की खुटे, धनंजय बरमाल, विनय अहिरवार, कुनाल रामटेके, लोकेश उके, मिलिन खोब्रागढहे, अविनाश लहरे, भारती काठे आदि का कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान रहा।